Sunday, 5 May 2013

वानप्रस्‍थ आश्रम



  ब्रह्मचर्य की मेहनत और गृहस्‍थ आश्रम की जिम्‍मेदारियों के बाद माया का जाल समेटने का क्रम वानप्रस्‍थ आश्रम में शुरू हो जाता है। हालांकि यह सन्‍यास आश्रम से पहले का उपेक्षित समय दिखाई देता है, लेकिन गौर करें तो यह वह महत्‍वपूर्ण समय है जब कठिन श्रम से हासिल की गई अवस्‍था को छोड़ने के लिए इंसान सहज तैयार होने लगता है। एक ओर यह मुक्ति का आधार बनता है, तो दूसरी ओर नई पौध को आगे बढ़ने के अवसर देने का वक्‍त होता है।
जीवन के पचास वर्ष पूरे करने पर वानप्रस्‍थ आश्रम के बारे में जिज्ञासा उत्‍पन्‍न हुई। सतही तौर पर अध्‍ययन करने पर मैंने पाया कि अगली पीढ़ी को सत्‍ता का सहज हस्‍तांतरण करना इसका मूल भाव है। स्‍वयं को केन्‍द्रीय धारा से अलग करना इसलिए आवश्‍यक है ताकि आने वाली पीढ़ी को सपाट रास्‍ता मिले जिस पर वह निर्विघ्‍न आगे बढ़ सके।
एक अवस्‍था के बाद तंत्र से जुड़े रहना अप्राकृतिक तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन तंत्र के व्‍यापक हित के लिए यह बलिदान आवश्‍यक लगता है। ऑस्‍ट्रेलिया की क्रिकेट टीम लंबे समय तक सर्वश्रेष्‍ठ टीम के रूप में इसीलिए टिक पाई क्‍योंकि उनके स्‍थापित खिलाडि़यों ने अपने प्रदर्शन के चरम के बावजूद समय रहते नए खिलाडि़यों को मौका दिया, और खुद किनारे हो गए।
वनस्‍पति अगर प्राकृतिक रूप से क्षय होती है, तो जमीन की उर्वरता बनी रहती है, लेकिन दीमक लगकर गिरने पर वह भूमि की उर्वरता को नुकसान ही पहुंचाती है। औरंगजेब पचास साल की उम्र तक शहजादा ही बना रहा, आखिर उसे शाहजहां को जबरन कैद करना पड़ा, तभी वह अपने विचारों को अंजाम दे पाया। हालांकि तंत्र में पहले से स्‍थापितों को नकारा नहीं जा सकता, लेकिन समय पर अगली पीढ़ी को मौका देने से तंत्र शायद अधिक प्रभावी बन पाएगा।
सीमित संसाधनों में जीवन यापन करना, जीवन के अंधाधुंध दौड़ में दौड़ की गति को विरलता देते हुए स्‍वयं को धीरे धीरे दौड़ से अलग करना वानप्रस्‍थ अवस्‍था का दूसरा पहलू है। आइंस्‍टाइन ने विदित किया था हम अपने मस्तिष्‍क की क्षमता का छोटा सा अंश ही अपने पूरे जीवनकाल में इस्‍तेमाल कर पाते हैं। इंसान अपने व्‍यवसाय से जुड़े क्षेत्र के इर्द गिर्द मस्तिष्‍क का उपयोग करता है। वानप्रस्‍थ अवस्‍था मस्तिष्‍क को मूल व्‍यवसाय के अलावा अन्‍य नैसर्गिक प्रवृत्तियों को विकसित करने का समय है। 
धार्मिक सामाजिक कार्यों में लगने से इस उम्र में एक स्‍वाभाविक शांति मिलती है। जहां से अर्जित किया, उसी को अर्पित करना ही इसका अंतिम भाव है। हालांकि बिल गेट्स यहूदी हैं, लेकिन उन्‍होंने वैदिक धर्म के अनुसार अपने जीवन की तीन अवस्‍थाओं को भरपूर जीया है। मेरी नजर में वे आश्रम सिस्‍टम के ब्रांड एम्‍बेसडर हैं। उनका भारतीय संस्‍करण कमोबेश इंफोसिस के संस्‍थापक नारायण मूर्ति के रूप में देखा जा सकता है। जो फर्श से अर्श पर पहुंचे और अपनी इच्‍छा से महत्‍वपूर्ण पदों और स्थितियों को त्‍यागकर सहज जीवनयापन कर रहे हैं। 

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